संस्था की शाखाएं

  • एस. पी. जैन गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खुरई
  • ज्ञानोदय सर्वमंगल विद्या मन्दिर सीनियर सेकण्डरी स्कूल, खुरई
  • श्री पार्श्वनाथ जैन गुरुकुल प्राथमिक विद्यालय, खुरई
  • श्री पार्श्वनाथ जैन गुरुकुल प्राथमिक विद्यालय, कौरासा
  • श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्याश्रम जैन गुरुकुल (छात्रावास)

एस. पी. जैन गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खुरई

कृषिपण्डित श्रीमंत सेठ ऋषभकुमार जी द्वारा प्रदत्त 10 एकड़ भूमि पर चहुँमुखी विकास के सोपान तय करता हुआ एस.पी. जैन गुरूकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय “गुरुकुल, खुरई” के नाम से देश-विदेश में विख्यात है। प्रारंभ में केवल 5 छात्रों से शुरू हुआ विद्यालय आज 1200 से अधिक विद्यार्थियों की ज्ञान पिपासा को शांत कर रहा । गुरुकुल के प्रारंभिक काल में लगभग 12-13 वर्ष यहाँ के छात्र हाईस्कूल परीक्षा स्वाध्यायी छात्रों के रूप में दिया करते थे परन्तु सन् 1957-58 के पावन सत्र में गुरुकुल को शासकीय मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया और हीनता के स्थान पर स्वाभिमान का उदय हुआ। हायर सेकण्डरी के परीक्षा परिणाम के बाद से धीरे-धीरे गुरुकुल विद्यालय में प्रवेशार्थियों की संख्या बढ़ने लगी। सन् 1963-64 में प्रयोगशाला, प्राचार्य कक्ष, कार्यालय, पुस्तकालय आदि को भी आश्रय प्राप्त हुआ। सन् 1976 में पहली बार बालिकाओं को प्रवेश दिया गया। इस प्रकार के अनेकानेक उतार-चढ़ाव के पश्चात् आज गुरुकुल विद्यालय समृद्ध हो चुका है। गुरुकुल विद्यालय को इस मुकाम तक पहुँचाने में बहुत ही आत्मीय भावनाओं के साथ पाठशालाओं के पर्याय परमपूज्य गणेशप्रसाद जी वर्णी, पं. देवकीनंदन जी शास्त्री, पं. जगमोहन लाल जी शास्त्री, ब्र. माणिकचन्द्र जी चंवरे, डॉ. परमेष्ठीदास जी जैन, डॉ. नेमिचन्द जी जैन जैसे समर्पित शिक्षाविदों का तथा संपूर्ण खुरई समाज का तन-मन-धन से समर्पण रहा।

वर्तमान में गुरुकुल विद्यालय में छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ खेल-कूद, संगीत, योग, बौद्धिक गतिविधियों जैसे वादविवाद, तात्कालिक भाषण, निबंध, भाषण आदि गतिविधियों के साथ एन.सी.सी., स्काउट आदि का भी सफल संचालन किया जाता है, जिसके माध्यम से बच्चे देश सेवा में भी अपना योगदान दे पायें। कक्षा छठवीं से दसवीं तक हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सा. विज्ञान विषयों का अध्ययन कराया जाता है तो वहीं ग्यारहवीं एवं बारहवीं में हिन्दी, अंग्रेजी विषयों के साथ-साथ कॉमर्स, कला, कृषि, वाणिज्य, विज्ञान संकायों का संचालन किया जाता है।

ज्ञानोदय सर्वमंगल विद्या मन्दिर सीनियर सेकण्डरी स्कूल, खुरई

जिस समय गुरुकुल विद्यालय का जन्म हुआ उस समय शायद ज्ञानोदय विद्यालय की स्थापना के विषय में गुरुकुल के व्यवस्थापकों ने विचार भी नहीं किया होगा। परन्तु एक बार की बात है जब श्री लाल मन्दिर में एक छात्रा को गुरुकुल के श्रेष्ठी श्री माणिकचन्द जी चँवरे ने दर्शन करते हुए देखा। छात्रा को जिनेन्द्र भगवान के दर्शन करते हुए देखकर उन्होंने विचार किया कि ‘‘यह छात्रा जन्म से तो जैन है तभी दर्शन करने आई है परन्तु शायद कान्वेंट शिक्षा ग्रहण करने की दौड़ में जैन संस्कारों से दूर हो गई है और यहाँ तक कि जिनेन्द्र भगवान के दर्शन भी मानो ऐसे कर रही है जैसे चर्च में खड़ी हो।’’ तभी उन्होंने निर्णय लिया कि हम भी अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय की स्थापना करेंगे और जैन सिद्धान्तों से विद्यार्थियों का परिचय करायेंगे। श्री चँवरे जी ने नगर श्रेष्ठी श्रीमंत सेठ ऋषभ कुमार जी से जब इस घटित घटना को सुनाया और अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय को स्थापित करने की बात रखी तो उन्होंने भी तुरंत अपना स्वीकृति प्रदान कर गुरुकुल परिसर में ही ज्ञानोदय विद्यालय को स्थान दिया।

1944 में गुरुकुल की स्थापना के ठीक 45 वर्ष पश्चात् ज्ञानोदय का उद्भव हुआ। अंग्रेजी की अनिवार्यता को देखते हुए सन् 1989 में केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.ई.) से मान्यता प्राप्त करके समस्त विषयों को और सुविधाओं को समाहित करते हुए इसकी शुरुआत की गई। गुरुकुल विद्यालय की तर्ज पर ही ज्ञानोदय विद्यालय में लौकिक एवं पारलौकिक अर्थात जीवन निर्माण एवं निर्वाण की कला सिखाई जाती है। ज्ञानोदय विद्यालय में वर्तमान में प्राथमिक से बारहवीं तक लगभग 1600 छात्र-छात्रायें अध्ययनरत् हैं जहाँ विषयों के साथ-साथ संगीत, क्राफ्ट, जूडो-कराटे, खेलकूद, योग आदि की शिक्षा प्रदान की जाती है।

श्री पार्श्वनाथ जैन गुरुकुल प्राथमिक विद्यालय, खुरई

वर्तमान दोष पूर्ण शिक्षा नीति के कारण कक्षा छठवीं में प्रवेश पाने वाले छात्रों की शैक्षणिक आधार शिला की कमजोरी को देखते हुये नन्हें मुन्ने बच्चों को प्राथमिक स्तर की शिक्षा एवं नैतिक संस्कारों को उत्पन्न करने हेतु वर्ष 2002 में श्री पार्श्वनाथ जैन गुरुकुल प्राथमिक विद्यालय के रुप में प्राथमिक विभाग की कक्षायें प्रारम्भ की गईं, जिसमें इन बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा के साथ साथ भारतीय संस्कारों का बीजारोपण किया जाता हैं। जहाँ लगभग 500 बच्चे अध्ययनरत हैं।

श्री पार्श्वनाथ जैन गुरुकुल प्राथमिक विद्यालय, कौरासा

मनुष्य के जीवन में प्राकृतिक सौन्दर्य संरचना को सुन्दर संगठित व आलौकिक बनाने के लिये शिक्षा अति आवश्यक है और शायद इसी भावना से श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्याश्रम जैन गुरुकुल ट्रस्ट ने नगर से बाहर एक ऐसे गाँव में ग्रामीण शिक्षा को देना उचित समझा जहाँ वास्तव में शिक्षा की आवश्यकता थी। खुरई से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक बहुत छोटा सा गाँव जिसका नाम है कौरासा। जहाँ वर्तमान में वेडिया समाज की बहुलता है और जिनका कार्य लगभग सातों व्यसनों में लिप्त रहना है। अर्थात् वेश्यावृत्ति, चोरी, सट्टा, जुआ, मद्यपान आदि सामान्य है। ऐसी समाज के बच्चे भविष्य में अपने पैरों पर निर्भर हो सके और वर्तमान की बुराईयों का त्याग कर समाज में सम्मान प्राप्त कर सकें इस भावना से गुरुकुल ट्रस्ट एवं संस्थाध्यक्ष श्रीमंत धर्मेन्द्र सेठ ने एस. पी. जैन गुरुकुल प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की। जिसमें सर्वप्रथम कक्षा शिशु से तृतीय तक और कुछ समय पश्चात् पाँचवीं तक विद्यालय संचालित किया गया। अब वर्तमान में बच्चों की बढ़ती हुई संख्या को देखकर वर्ष 2018-2019 मे कक्षा आठवीं तक की कक्षायें प्रारंभ हो चुकी हैं।

श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्याश्रम जैन गुरुकुल (छात्रावास)

खुरई समाज के द्वारा निर्णय लिया गया कि दक्षिणान्चल में स्थित कारंजा, कुम्भोज बाहुबलि आदि गुरूकुलों के अनुकरण पर ही इस गुरूकुल का शारीरिक सौष्ठव सँवारा जाये। इसे साकार रूप देने के लिए तत्कालीन क्षुल्लक सम्प्रति समाधिस्थ आचार्य श्री 108 समन्तभद्र जी महाराज, पण्डित श्री देवकीनन्दन जी सिद्धान्तशास्त्री एवं पूज्य 105 श्री गणेशप्रसाद जी वर्णी को आमंत्रित करने का निश्चय किया गया।

गुरुकुल का जन्मोत्सव अप्रैल सन् 1944 वि. सं. 2001 की अक्षय तृतीय के दिन सागर जिलान्तर्गत खुरई नगर में हुआ। इसका मांगलिक शुभारम्भ शिक्षा प्रचारक, धर्म प्रेमी गुरुवर्य श्री गणेशप्रसाद जी वर्णी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। जिसमें स्थानीय धनकुबेर श्रीमन्त सेठ ऋषभ कुमार जी ने सर्वप्रथम 1944 में नगर से बाहर स्वयं के पुराने बगीचा से इसकी शुरुआत की तत्पश्चात् शहर के बीचोंबीच स्थित मिड टाउन और अंततः 1954 में स्टेशन के समीप 7 एकड़ भूमि पर चैत्यालय, विद्यालय भवन, भोजनशाला, खेल मैदान एवं शिक्षक निवास का निर्माण कराकर दान स्वरूप संस्था को दिया तथा सिंघई गनपतलाल जी गुरहा ने 20,000/- राशि देने का संकल्प किया उससे एक द्वि मंजिला छात्रावास बनवाया। आर्थिक सम्बल प्रदान करते हुए सिंघई श्री श्रीनन्दनलाल जी जैन बीना वालों ने संस्था को ग्राम लाखनखेड़ा में स्थित 84 एकड़ भूमि दान स्वरूप दी जिसकी उपज गुरुकुल छात्रावास की स्थायी आय का साधन बनी, साथ ही श्रीमति नायकन राजरानी बहू जी द्वारा परसा चैराहा पर स्थित महावीर धर्मशाला संस्था को दान स्वरूप दी गई।

वर्तमान में जैन समाज के दूर दराज के साधन विहीन एवं निर्धन छात्रों को जीवन निर्माण एवं निर्वाण की शिक्षा प्राप्त कराने के उद्देश्य से यह छात्रावास मात्र 5 छात्रों से प्रारम्भ हुआ जिसमें वर्तमान में 300 छात्र रहकर हिन्दी एवं अग्रेजी माध्यम की आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे है।

पुराने छात्रावास एवं भोजनशाला का भवन जीर्णशीर्ण हो जाने के कारण वर्तमान में नवीन छात्रावास एवं भोजनशाला का निर्माण कराया है, जिसमे आधुनिक सुविधायें उपलब्ध करायी गयी है। छात्रावासीय छात्रों में समाज और राष्ट्र के प्रति विनय, अनुशासन एवं नैतिक सस्कारों का विकास करना तथा जीवनोपयोगी लौकिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा सुयोग्य नागरिक बनाना संस्था का उद्देश्य है। छात्रों को शुद्ध सात्विक भोजन, प्राथमिक चिकित्सा के साथ साथ जीवनोपयोग की समस्त व्यवस्थायें उपलब्ध हैं। छात्रावास की वर्तमान व्यवस्थाओं को देखते हुए यहाँ पर जैन ही नहीं अपितु जैनेतर के हर वर्ग का अभिभावक छात्रावास में अपने बालक का प्रवेश कराने हेतु आतुर रहता है।