एक नजर में-गुरुकुल

इस ट्रस्ट की स्थापना वीर निर्वाण संवत् 2070 सन 1944 में वैशाख शुक्ल तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर हुई। यह संस्थान महाराष्ट्र केसरी परम पूज्यनीय आचार्य श्री 108 समन्तभद्र जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं बुंदेलखंड गौरव क्षुल्लक 105 गणेश प्रसाद वर्णी के पावन आशीर्वाद से प्रारंभ किया गया। इसको मूर्तरुप देने में नगर श्रेष्ठी कृषिपण्डित श्रीमंत सेठ श्री ऋषभकुमार जी जैन का योगदान स्तुत्य है, जिन्होंने लगभग 7 एकड़ जमीन संस्था को दान स्वरुप प्रदान की एवं छात्रावास भवन, चैत्यालय एवं शिक्षा हेतु विद्यालय भवन का निर्माण कराया। प्रारंभ में संस्था के संचालन का दायित्व पंडित जगनमोहन लाल जी शास्त्री (कटनी) ने संभाला। अनेक वर्षों तक पंडित जी के निर्देशन में संस्था ने सामाजिक क्षेत्र के साथ-साथ शैक्षणिक क्षेत्र में भी कार्य किया।

संस्था का उद्देश्य अहिंसा, सदाचार, स्वावलंबन, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को धारण करने वाली संतती समाज को प्रदान करना है। संस्था के द्वारा संचालित शैक्षणिक प्रकल्पों के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ ही एक आदर्श एवं नेक इंसान बनाना भी है, जो समाज को दिशा प्रदान करने में समर्थ हो। इस संस्थान ने परतन्त्रता से स्वतन्त्रता तक का सफर पूर्ण किया है और तब से अर्थात् 1944 में स्थापित यह संस्थान आज भी अनवरत अपने उद्देश्य की पूर्ति में संलग्न है।

आज ‘‘श्री पार्श्वनाथ ब्रह्मचर्याश्रम जैन गुरुकुल ट्रस्ट’’ के मार्गदर्शन में संचालित एस. पी. जैन गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (हिन्दी माध्यम), ज्ञानोदय सर्वमंगल विद्या मन्दिर (अंग्रेजी माध्यम), श्री पार्श्वनाथ जैन गुरुकुल प्राथमिक विद्यालय, एस. पी. जैन गुरुकुल माध्यमिक विद्यालय, कौरासा (ग्रामीण शाखा) में लगभग 4000 से अधिक छात्र-छात्रायें अध्ययनरत हैं एवं लगभग 13000 से अधिक छात्र-छात्रायें अध्ययन पूर्ण करके समाज में श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं। गुरुकुल द्वारा संचालित छात्रावास में आर्थिक रुप से कमजोर छात्रों को अध्ययन कराया जाता है ध्यातव्य हो कि वर्तमान में लगभग 300 छात्र छात्रावास में निवासरत हैं।

आप सहर्ष उदार मन से इस कार्य का हिस्सा बन सकते हैं। यदि आप गुरुकुल के सहयोगी बनना चाहते हैं तो एक बार प्रत्यक्ष अवलोकन कर इस महान कार्य के साक्षी बनें। आपका तन-मन-धन से किया गया सहयोग समाज में श्रेष्ठ नागरिकों को प्रदान करने में सम्बल होगा।